जीवन जीना

में बड़ा नसीब वाला था कि मुझे मेरी मम्मी मीली क्योंकि हमारी मम्मी कुछ अच्छा सिखाया करती थी वो हमेशा हमको कहती थी कि किशन तुम जीन्दगी के पीछे मत भागो उसको जीना सीखो । 

                    अगर तुम जीन्दगी को जीवोगे नहीं और इस संसार के फक्कङ पन में ही अपनी जीन्दगी को  खपा दोगे तो तुनै  क्या जीन्दगी जी फिर इस जीवन को जीने का क्या मतलब रहा क्योंकि असल में जीन्दगी जीना तों उसे कहते हैं जो अपनी जीन्दगी को आराम व मजबूती से जीये।

                    जीन्दगी कहीं भाग कर नहीं जाने वाली ओर जीन्दगी कहीं रुकने नहीं वाली क्योंकि ये मनुष्य के हाथ में नहीं रहती हैं। 

           अपने आप को इतना मजबूत व ताकतवर बनाओ कि आप इस जीन्दगी के तुफानों को पार कर सको ओर उन्हें पीछे छोड़कर आगे बढ़ सके।

               जीवन कोई कोम्पीटिसन नहीं जीने आप जीसे आप किसी से आगे ले जाना चाहते हों ये तों बस होंसले की बुनियाद हैं जिसे आपने जड़ा किया है।

               जीन्दगी को सही अर्थों में ही जीना एक जीवन जीना है उसे अपने तरीके से डालना ही एक अच्छा जीवन जीना है।

                       जय हिन्द जय भारत
      -किशन लाल बासनीवाल

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